सफर साथ उसके
हाथों में हाथ लिए
सात फेरे, सात वचन लिए जिसके साथ
उस घर की उस लाडो से
प्यार लड़ाना चाहता हूँ !
फुर्सत के कुछ पल गुजार
साथ-साथ चलना चाहता हूँ !
रुक ऐ भागती जिंदगी
मैं उसके साथ सफर करना चाहता हूँ !
महसूस करूँ, प्रेम को उसकी आँखों में
वो आस जागना चाहता हूँ!
"मैं" हूँ ये महसूस करे वो
विश्वास मन में उसके जागना चाहता हूँ !
माँग भरी जिसकी सुहानी शाम में,
संग उसके डूबते सूरज को निहारना चाहता हूँ !
रुक जा ऐ खूबसूरत जिंदगी,
मैं उसके साथ जीवन का सफर
करना चाहता हूँ...!
जलती रहीं चिताएँ विश्वास की
जलती रहीं चिताएँ विश्वास की
आँखों के आँसू सूख गए !
जन्म-जन्मांतर के नाते-कसमें
एक पल में ही रूठ गए !
तिल-तिल चुनकर आशियाना बना
पक्षी सफर पर उड़ गए !
सीधी सड़क के मुसाफिर
बिन मोड़ के मुड़ गए ...!
प्रिय! रूठा न करो
जमाने को लगा लें सीने से,
मगर सीने में धड़कते इस दिल पर राज है तुम्हारा।
मुँह फुला लेना, नाराज हो जाना तुम्हारा
मन को देर तक सालता है।
ख्याल रखा करो जरा
हमारा नहीं,
इस दिल का जहाँ बसेरा है तुम्हारा ।
रूठ कर,
जरा जल्दी मान जाया करो प्रिय
इन साँसो पर बस कहाँ है हमारा।
देर हो गई तो फिर किसे मनाओगी
साँसे नहीं मानेगी कहा तुम्हारा
जैसे सूरज का कहना मान जाता है अंधेरा...!
चिपचिपी यादें
चिपचिपी-सी हैं उसकी यादें,
देर तक मन से चिपकी रहीं
अमिट, मीठी स्मृतियाँ छोड़ जाती हैं—
जैसे साल का अंतिम महीना, दिसंबर।
न्यूटन के नियम-सी अटल,
यादें लौट आती हैं उसकी
हर शाम,
उस अंधेरे के साथ।
मन को खुरचता वह नशा—
जिसके नशे में मैं
डूबता चला जाता हूँ
सुबह जिंदगी की दौड़ में छोड़।
कील
हर कील पर पड़ी हथौड़ी की चोट का,
मापदण्ड एक !
सहारा बने या रहे निरंक,
बौद्धिक जीवन की रेख !
तपना होगा कसौटी की आग पर
तब जाकर,
जीवन को मिलती है महक !
..........................................रचनाकार परिचय
नाम - कमलेश यदुवंशी
पिता - श्री मुनीम लाल यदुवंशी
माता - श्रीमति रमता यदुवंशी
जन्मतिथि - 15.07.1988
पता - ग्रा० - हर्राहेट, पो० - पैजनवाड़ा
तह० - परासिया, जिला - छिन्दवाड़ा
पिन न - 480557
मो०नं० - 8435260726
ई मेल - yaduwanshi525@gmail.com
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