मेरी कविताएँ
मेरी कविताएँ शायद काग़ज़ी घोड़े हैंया,
महज़ शब्दों की कलाबाज़ियाँ
कल्पना की महीन कोशिकाओं में
महसूस करता हूँ टीस
खोखले बयानबाज़ी से रचता हूँ संसार
कपाल की कठोर हड्डियों में कुशलता से
टाँकता हूँ संवेदनाओं के पैबंद
और इस तरह पृष्ठ के मध्य लिखता हूँ
हाशिये का दर्द...
मैं मज़दूर हूँ
मैं एक मज़दूर हूँमेरी भुजाओं में फड़कती है धरती
ये तोड़ सकते हैं पहाड़ों को
और मोड़ सकते हैं नदियों की धाराओं को....
मेरे पाँव बड़े बलशाली...
थकते नहीं, रुकते नहीं
अपने कंधों पर उठाता हूँ संसार
मेरी मुट्ठी में क्रांति है
मेरे होठों पर गीत हैं और आँखों में पानी
मेरा पेट...मेरा पेट...
नहीं मैं झूठ नहीं बोल सकत
रिक्शावाला
तीन पहियों से बिठाकर साम्यगति से
भागता है आगे
फिर भी पीछे बैठे हुए आदमी से
बहुत पीछे
छूट जाता है रिक्शावाला
ऊपर उठता है सिर्फ़ धुआँ
पोटली में बाँध कर चाँदजब कोई निकलता है निगलने सूरज
तब गर्म पसीने की उम्मीद में सांवली मिट्टी
कुछ और नम हो जाती है...
और दिन भर पिघलती हुई ख़्वाहिशें
सिमट कर कुछ और कम हो जाती हैं
शाम ढले घास और जलावन लेकर
घर लौटती उस गोरी पर चस्पाँ होता है चुपचाप
एक और स्याह टुकड़ा
रात गये तपता है गोल-गोल चाँद
गर्म तवा पर
सि़र्फ खोखला धुआँ
ऊपर उठता है आसमान
हँसता है कंकाल
वे जो पहाड़ों की सैर नहीं करतेअपने कंधों पे ढोते हैं पहाड़...
वे जिनके बच्चे शायद कभी नहीं जोड़ पाएंगे
लाखों-करोड़ों का हिसाब
रटते हैं पहाड़ा
वे जो सींचते हैं धरती-गगन अपने लहू से
रोज़ मरते हैं पसीने की तेज़ाबी बू से
वे जो मौत से पहले ही हो जाते हैं
कंकाल
कभी रोते नहीं
शायद हँसी सहम कर
ठहर जाती है
हर कंकाल की बत्तीसी में...
अपना गेहूँ
उधार का आटा आँचल में लेकरघर लौटती है वह शाम को अक्सर
ठंडा चूल्हा पल भर जल कर
सो जाता फिर आँखें बंद कर
सूनी आँखों में सपना बुन कर
वह भी सोती है पहर भर
रात भर उन आँखों का सपना
सींचता रहता है गेहूँ अपना
बच्चों की किलकारियाँ
घुन खाए पाँवों से नाप लूँगापथरीली सड़क
जा पहुँचूँगा उस पार
लौह द्वार तक
शिथिल पेशियों से जकड़ लूँगा
गर्दन
पोपले मुँह में चबा लूँगा
अकड़ी हुई हड्डियाँ
खाली हाथ में फिर भर लाऊँगा
अपने बच्चों की किलकारियाँ...
पिता
बच्चे बड़े हो गयेऔर बौना हो गया है पिता
घर का एक बेकार कोना
बिछौना हो गया है पिता
अपने पाँव पर खड़े हो गये
खेलते बच्चे
और खिलौना हो गया है पिता...
युद्ध जीता कौन?
बंजर खेतों में ढूंढना सि़र्फ बारूद की फ़सलेंगर्द-आलूद फौजी जूतों में देखना जरखेज़ मिट्टी के
निशान...
पूछना उस वीरान शहर से उसे आबाद होने में
कितना वक्त लगा था
और कितना वक्त लगा था उसे वीरान होने में...
पूछना हुनरमन्द
सिपहसालारों से
युद्ध आखिर जीता कौन
खौफनाक ज़िन्दा चीखें या मुर्दों का मौन...
फेसबुक
काश हर चेहरा किताब होताकितनी आसानी से पढ़ लेता
हर दिल की इबारत और पहचान लेता
हर सूरत की हकीकत...
काश हर चेहरा किताब होता तो लफ्ज़ों की
धूप-छाँव में ढूँढ लाता ज़िंदगी,
भांप लेता खिलखिलाते लोगों का दर्द
काश हर चेहरा किताब होता...
तो चुपके से देख लेता खामोश अदावत
नर्म व नाज़ुक लहज़ों की बारी़क साज़िशें और
मुहब्बत भरी निग़ाहों से झाँकती हि़कारत
शायद चेहरा किताब नहीं, नकाब होता है
जिसमें छुपे होते हैं कई-कई चेहरे...
ज़िंदगी
जैसे-जैसे बढ़ते जा रहे हैं दिनऔर
बढ़ती जा रही हैं ज़िम्मेदारियाँ
वैसे-वैसे घटता जा रहा हूँ मैं
सिकुड़ता है कतरा-़कतरा मेरा वजूद
शायद ज़िंदगी
रात-दिन और दिन-रात को
जीने की आदत है
दूसरी आदतों की तरह
अमूमन यह आदत भी
आसानी से कहाँ साथ छोड़ती है
पान-तम्बाकू की तरह है
यह ज़िंदगी
जो
वक्त के मुँह में चुपचाप
घुलती रहती है।
असलम हसन
ग्राम : कमलदाहा, जिला-अररिया (बिहार)
शिक्षा : स्नातक, इतिहास (प्रतिष्ठा), अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय
स्नातकोत्तर (ग्रामीण अध्ययन), पटना विश्वविद्यालय
प्रकाशन : प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं यथा हंस, मंतव्य, देशज, पाखी, बया, कथादेश, आजकल, कादम्बिनी, समकालीन सरोकार इत्यादि में रचनाएँ प्रकाशित। नवसाक्षरों के लिए लेखन। इतिहास लेखन में विशेष रुचि।
पुरस्कार / उपलब्धि : युवा कवि पुरस्कार (‘समन्वय’, पटना), कविताश्री सम्मान (एस. आर. एम. विश्वविद्यालय, चेन्नई), विशिष्ट हिन्दी सेवी सम्मान (विशाखा हिन्दी परिषद, विशाखापट्टनम), प्रेमचंद सम्मान (आईडियल ड्रामा अकादमी, मुंबई), लाल बहादुर शास्त्री प्रशासनिक अकादमी, मसूरी द्वारा आयोजित कविता प्रतियोगिता में प्रमुख स्थान।
* कुछ कविताओं को अन्य भाषाओं में अनुवाद व नाट्य मंचन। साहित्य अकादमी (नई दिल्ली), रेख्ता सहित देश भर के अन्य प्रतिष्ठित साहित्यिक मंचों से कविता पाठ।
संकलन-संपादन : दरीचे की धूप (उर्दू काव्य संग्रह)
संस्थापक : बज़्म-ए-हसन (शायर जुबैरूल हसन ‘गाफिल’ की स्मृति में स्थापित साहित्यिक-सांस्कृतिक मंच)
लोकप्रिय पाश्र्व गायकों-गायिकाओं उदित नारायण, डॉ. रंजना झा, जुबिन नौटियाल, जावेद अली, खनक जोशी द्वारा कुछ गीतों की गायन।
सम्प्रति : ‘भारतीय राजस्व सेवा’ के अंतर्गत आयुक्त, सीमा शुल्क मुंबई के पद पर कार्यरत।
पता : बंगला नंबर-4, प्रथम तल, कस्टम्स क्र्वाटर, फाईव गार्डन, माटुंगा (ईस्ट), मुंबई-400019
मोबाइल : 7032613786


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